शीर्षक: झज्जर-बहादुरगढ़ न्यूज़: आसौदा और बहादुरगढ़ मंडी में पहुंचा 2063 क्विंटल गेहूं, किसानों को सरकारी खरीद का इंतजार
लेखक: हिंदुस्तानटाक.co.in
तिथि: 6 अप्रैल 2026
झज्जर/बहादुरगढ़: हरियाणा के झज्जर और बहादुरगढ़ क्षेत्र के किसानों के लिए एक अहम खबर सामने आई है। रबी सीजन 2026 में गेहूं की आवक तेज हो गई है। ताजा जानकारी के अनुसार, झज्जर जिले की प्रमुख मंडियों आसौदा और बहादुरगढ़ में अब तक कुल 2063 क्विंटल गेहूं पहुंच चुका है। यह आंकड़ा किसानों की मेहनत और इस बार हुई अच्छी पैदावार को दर्शाता है।
मंडीवार गेहूं आवक का ब्यौरा
बहादुरगढ़ मंडी में इन दिनों गेहूं की ढुलाई को लेकर किसानों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। बहादुरगढ़ मंडी में अकेले 1400 क्विंटल गेहूं पहुंच चुका है। वहीं, आसौदा मंडी में अब तक 663 क्विंटल गेहूं की एंट्री हुई है। मिलाकर देखें तो दोनों मंडियों में 2063 क्विंटल गेहूं मौजूद है।
मंडी सचिवों के अनुसार आने वाले दिनों में इस संख्या में और इजाफा होने की संभावना है, क्योंकि कटाई का काम जोरों पर है। किसान अपनी उपज को मंडियों तक पहुंचाने में जुटे हैं।
किसानों को क्या है उम्मीद?
हरियाणा सरकार ने गेहूं के समर्थन मूल्य (MSP) की घोषणा पहले ही कर दी थी। इस बार न्यूनतम समर्थन मूल्य 2425 रुपये प्रति क्विंटल रखा गया है। किसानों को उम्मीद है कि उनकी पूरी फसल इसी दाम पर सरकारी एजेंसियों (जैसे हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन, फूड सप्लाई विभाग) द्वारा खरीदी जाएगी। हालांकि, किसानों के बीच यह भी चिंता है कि कहीं निजी व्यापारी मंडियों में सेंध न लगा दें और सरकारी खरीद में देरी न हो।
आसौदा मंडी की स्थिति
आसौदा मंडी झज्जर जिले की एक महत्वपूर्ण अनाज मंडी है। यहां पर गेहूं की क्वालिटी को लेकर सख्ती बरती जा रही है। मंडी समिति के अधिकारियों ने बताया कि अब तक आए गेहूं में नमी की मात्रा सामान्य पाई गई है। हालांकि, कुछ किसानों को फसल को सुखाकर लाने की सलाह दी गई है। आसौदा मंडी में फिलहाल 663 क्विंटल गेहूं स्टॉक में है और इसकी बोली की प्रक्रिया जारी है।
बहादुरगढ़ मंडी में हलचल
बहादुरगढ़ मंडी में गेहूं की आवक सबसे ज्यादा हुई है। यहां 1400 क्विंटल गेहूं पहुंचने से मंडी परिसर में काफी चहल-पहल है। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं। बहादुरगढ़ मंडी में सरकारी एजेंसियों के अलावा कुछ निजी मिलें भी खरीदारी कर रही हैं, लेकिन किसानों को MSP से कम दाम देने पर शिकायतें भी सामने आई हैं। मंडी सचिव ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यापारी MSP से कम दाम पर गेहूं खरीदता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पिछले साल के मुकाबले कम आवक क्यों?
हालांकि अब तक 2063 क्विंटल गेहूं पहुंचना एक अच्छा संकेत है, लेकिन किसानों का कहना है कि इस बार फसल पिछले साल के मुकाबले थोड़ी देर से तैयार हुई है। फरवरी में मौसम में आए बदलाव और अप्रैल की शुरुआत में पड़ी ठंडी हवाओं के कारण फसल की कटाई में 10-12 दिन की देरी हुई है। यही कारण है कि अब तक उतनी भारी मात्रा में गेहूं मंडियों में नहीं पहुंचा है, जितनी आमतौर पर इस समय तक पहुंच जाती थी। उम्मीद जताई जा रही है कि 15 अप्रैल के बाद आवक में भारी उछाल आएगा।
प्रशासन की तैयारियां
झज्जर जिला प्रशासन ने मंडियों में किसानों को होने वाली किसी भी परेशानी से निपटने के लिए कमर कस ली है। बहादुरगढ़ और आसौदा मंडी में किसानों के बैठने, ट्रॉलियों की पार्किंग और पेयजल की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, झुलसा रोग रहित और साफ गेहूं की खरीद पर जोर दिया जा रहा है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपना गेहूं अच्छी तरह सुखाकर ही मंडी लाएं, ताकि उनकी फसल रिजेक्ट न हो।
किसानों की आवाज
बहादुरगढ़ मंडी में अपना गेहूं बेचने आए किसान राजेंद्र सिंह ने बताया, "इस बार फसल अच्छी हुई है, लेकिन मंडी में सरकारी एजेंसियों को जल्दी तैनात करना चाहिए। डर है कि कहीं निजी कारोबारी कम दाम न दे दें।" वहीं, आसौदा मंडी के एक अन्य किसान सुरेंद्र कुमार ने कहा, "हमें 2425 रुपये क्विंटल के हिसाब से तुरंत भुगतान चाहिए। अगर देरी हुई तो हमारा नुकसान होगा।"
आगे की रणनीति
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकार किसानों से उनकी पूरी फसल MSP पर खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है। जैसे-जैसे आवक बढ़ेगी, मंडियों में अतिरिक्त लेबर और खरीद केंद्र बढ़ाए जाएंगे। फिलहाल दोनों मंडियों में कुल 2063 क्विंटल गेहूं की उपलब्धता है, जिसमें से लगभग 30 फीसदी की खरीद हो चुकी है। शेष गेहूं की बोली प्रक्रिया जारी है।
निष्कर्ष
आसौदा और बहादुरगढ़ मंडी में 2063 क्विंटल गेहूं पहुंचना झज्जर-बहादुरगढ़ क्षेत्र के लिए रबी सीजन की शुरुआत का संकेत है। किसानों को उम्मीद है कि इस बार उन्हें MSP का पूरा लाभ मिलेगा और उनकी मेहनत रंग लाएगी। प्रशासन भी किसानों को किसी तरह की असुविधा न हो, इसका पूरा ध्यान रख रहा है। अब देखना यह है कि आने वाले हफ्तों में आवक का यह आंकड़ा कितना बढ़ता है और खरीद प्रक्रिया कितनी सुचारू रहती है।
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