तेहरान-जेरूसलम-वाशिंगटन।इजरायल ने लेबनान में जारी युद्ध को लेकर बुधवार देर शाम एक अहम बैठक बुलाई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सुरक्षा कैबिनेट रात आठ बजे (भारतीय समयानुसार रात सवा नौ बजे) संभावित युद्धविराम पर चर्चा के लिए जुटेगी। इस बैठक के बीच ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी करीबी सहयोगी इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें 'अस्वीकार्य' और 'बिना हिम्मत' की बता दिया है। यह विवाद ट्रंप के पोप लियो XIV पर किए गए हमले के बाद मेलोनी की प्रतिक्रिया को लेकर हुआ है, जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान के पास परमाणु बम होने से वह दो मिनट में पूरे इटली को उड़ा सकता है।
ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के नए दौर से पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीदें बंधी हैं। अमेरिका ने मंगलवार को वाशिंगटन में इजरायल और लेबनान के बीच दशकों में पहली बार प्रत्यक्ष वार्ता करवाई, जिसे ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है। हालांकि, इससे पहले सोमवार को नेतन्याहू ने लेबनान का दौरा कर युद्ध जारी रखने का ऐलान किया था। ऐसे में आज की बैठक से पहले सेना ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर जोरदार हमले जारी रखे हैं।
क्या होगा लेबनान में? सुरक्षा कैबिनेट में क्या है एजेंडा?
इजरायली अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री नेतन्याहू की बुधवार देर शाम होने वाली सुरक्षा कैबिनेट की बैठक में लेबनान में संभावित युद्धविराम पर चर्चा एजेंडे का मुख्य बिंदु है। रॉयटर्स समाचार एजेंसी के अनुसार, एक वरिष्ठ इजरायली अधिकारी ने पुष्टि की है कि कैबिनेट शाम 8 बजे (1700 GMT) बुलाई गई है और इस बैठक में युद्धविराम को लेकर "विस्तृत चर्चा" की जाएगी।
वहीं दूसरी तरफ, हिजबुल्लाह से जुड़े सूत्रों का कहना है कि युद्धविराम की घोषणा कुछ ही घंटों में हो सकती है। हिजबुल्लाह समर्थक लेबनानी चैनल 'अल-मयादीन' ने ईरान के एक उच्च सुरक्षा स्रोत के हवाले से दावा किया है कि संघर्ष विराम एक सप्ताह के लिए होगा और इसकी अवधि अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे अस्थायी युद्धविराम पर निर्भर करेगी।
इससे पहले, नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया था कि लेबनान में अभी युद्धविराम नहीं है। एक सप्ताह पहले दिए गए बयान में उन्होंने कहा था, "मैं आपको सूचित करना चाहता हूं: लेबनान में कोई युद्धविराम नहीं है। हम पूरी ताकत से हिजबुल्लाह पर हमले जारी रखेंगे और तब तक नहीं रुकेंगे जब तक हम आपकी सुरक्षा बहाल नहीं कर लेते"। हालांकि, अमेरिकी दबाव के चलते इजरायल ने बीते एक हफ्ते से बेरूत क्षेत्र पर हमले नहीं किए हैं, जबकि हिजबुल्लाह की तरफ से रॉकेट दागे जा रहे हैं।
युद्ध की भयावह तस्वीर और ऐतिहासिक वार्ता
यह युद्ध 2 मार्च को शुरू हुआ था, जब ईरान समर्थित हिजबुल्लाह ने तेहरान के समर्थन में इजरायल पर गोलियां चलाईं। लेबनानी अधिकारियों के अनुसार, अब तक इस युद्ध में 2,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 12 लाख से अधिक लोग अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं।
हालांकि, मंगलवार को वाशिंगटन में एक ऐतिहासिक घटना घटी, जब इजरायल और लेबनान के बीच पिछले 30 साल से अधिक समय में पहली बार प्रत्यक्ष राजनयिक वार्ता हुई। इस बैठक में लेबनानी राजदूत नादा हमादेह मोअवद और इजरायली राजदूत येचिएल लीटर शामिल हुए, जिसकी मेजबानी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने की।
हालांकि, बातचीत में दोनों पक्षों के रुख में साफ अंतर दिखा। लेबनान ने तत्काल युद्धविराम और मानवीय सहायता पर जोर दिया, जबकि इजरायल ने हिजबुल्लाह के निरस्त्रीकरण को शर्त बनाते हुए सैन्य कार्रवाई जारी रखने की बात कही।
ट्रंप-मेलोनी में जंग: क्या है विवाद?
पश्चिम एशिया के इस जटिल समीकरण के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी ही सहयोगी इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी पर जमकर निशाना साधा है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब ट्रंप ने पोप लियो XIV पर तीखा हमला बोला, जिसे मेलोनी ने "अस्वीकार्य" करार दिया।
ट्रंप ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रमुख इतालवी अखबार 'कोरिएरे डेला सेरा' को दिए इंटरव्यू में मेलोनी पर पलटवार किया। उन्होंने कहा, "मैं उनसे हैरान हूं। मुझे लगा था कि उनमें हिम्मत है, लेकिन मैं गलत था।" इससे पहले ट्रंप ने उन्हें 'यूरोप में तूफान लाने वाली खूबसूरत युवती' कहा था, लेकिन अब उनका सुर बदल गया है।
ट्रंप ने मेलोनी पर ईरान के प्रति नरम रुख अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा, "वह अस्वीकार्य हैं क्योंकि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि ईरान के पास परमाणु बम है। अगर ईरान के पास मौका मिला, तो वह इटली को दो मिनट में उड़ा देगा।" उन्होंने मेलोनी पर नाटो में सहयोग न करने और ईरान से तेल सुरक्षा के लिए न लड़ने का भी आरोप लगाया।
मेलोनी पर क्या बोले ट्रंप? और इटली में प्रतिक्रिया
ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए एक अन्य इंटरव्यू में और अधिक सख्त रुख अपनाते हुए कहा, "वह नकारात्मक रही हैं। कोई भी जिसने हमें ईरान मामले में मदद करने से मना कर दिया, उसके साथ हमारे वही संबंध नहीं हैं।"
उन्होंने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने इस महीने मेलोनी से बात नहीं की है, "बहुत समय से बात नहीं हुई है।" गौरतलब है कि इटली ने ईरान युद्ध में हिस्सा लेने से साफ इनकार कर दिया था और पिछले महीने सिसिली में एक प्रमुख अमेरिकी हवाई अड्डे पर अमेरिकी बमवर्षकों को उतरने की अनुमति देने से भी मना कर दिया था।
हालांकि, मेलोनी के विरोधियों और सहयोगियों ने उनके समर्थन में एकजुट होते हुए ट्रंप की आलोचना की। विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी ने कहा कि पश्चिमी एकता परस्पर सम्मान और वफादारी पर बनी है। वहीं, सेंटर-लेफ्ट डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता एली श्लेन ने संसद में कहा, "हमारा संविधान स्पष्ट है - इटली युद्ध का त्याग करता है।"
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह हमला मेलोनी के लिए 'वरदान' साबित हो सकता है। जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नथाली टोची ने कहा, "ट्रंप पूरे यूरोप और दुनिया में पूरी तरह से विषैले हो चुके हैं।"
वैश्विक स्तर पर देखें तो, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में प्रगति के संकेत मिल रहे हैं। रॉयटर्स के अनुसार, दोनों देशों के बीच एक रूपरेखा समझौते पर सहमति बन सकती है। यही वजह है कि ट्रंप ने पहले कहा था कि युद्ध "बहुत करीब" खत्म होने वाला है।
लेकिन इजरायल के लिए यह रास्ता आसान नहीं है। सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एयल जमीर ने चेतावनी दी है कि परमाणु या हार्मुज मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सेना हिजबुल्लाह के खिलाफ ताबड़तोड़ हमले जारी रखे हुए है।
यह लेख मध्य पूर्व के बढ़ते तनाव और वैश्विक राजनीति में उठ रहे नए विवादों की पड़ताल करता है। हमारे साथ बने रहें और दुनिया की सटीक खबरों के लिए देखते रहिए *HindustanTAk.co.in