पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: ‘भय’ बनाम ‘भरोसे’ की लड़ाई, 4 मई को होगा फैसला
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की जनता 23 और 29 अप्रैल को होने वाले दो चरणों के विधानसभा चुनाव में उस सवाल का जवाब देगी, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ शब्दों में पेश किया है – क्या बंगाल ‘TMC के भय’ को चुनेगा या ‘BJP के भरोसे’ को? यह चुनाव सिर्फ 294 सीटों के लिए नहीं है, बल्कि यह ममता बनर्जी के 15 साल के शासन की रिपोर्ट कार्ड और सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा की वैकल्पिक सरकार की संभावनाओं की परीक्षा है। 4 मई को मतगणना के दिन यह तय होगा कि ‘दीदी’ का किला बरकरार रहता है या फिर ‘खेला होबे’ सच होता है ।
1. पृष्ठभूमि: ‘दीदी’ बनाम ‘दादा’ की टक्कर
पश्चिम बंगाल का यह चुनावी समीकरण 2021 के उस चुनाव से काफी अलग है, जहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 213 सीटों के साथ हैट्रिक लगाई थी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 77 सीटें जीतकर मुख्य विपक्ष की भूमिका मजबूत की थी ।
लेकिन इस बार का माहौल ज्यादा गरम है। भाजपा ने न सिर्फ सियासी हमले तेज किए हैं, बल्कि रणनीतिक रूप से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उन्हीं के गढ़ भवानीपुर (भवानीपुर) में चुनौती देने का फैसला किया है। पार्टी ने विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी को न सिर्फ नंदीग्राम, बल्कि भवानीपुर से भी मैदान में उतारा है, जहां से खुद ममता बनर्जी चुनाव लड़ रही हैं । यह वही सुवेंदु अधिकारी हैं, जिन्होंने 2021 में नंदीग्राम में ममता बनर्जी को उनकी ही सीट से हराकर राजनीति में सनसनी फैला दी थी। अब यह ‘बदला’ की लड़ाई भवानीपुर में देखने को मिल रही है ।
2. प्रचार का मुद्दा: ‘महा जंगलराज’ बनाम ‘विकास’
इस बार का चुनावी बिगुल बेहद तीखे मुद्दों पर बज रहा है।
‘भय’ का मुद्दा: कानून-व्यवस्था पर सवाल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने सबसे जोरदार हमला TMC सरकार के कार्यकाल में बिगड़ते कानून-व्यवस्था पर किया है। हाल ही में मालदा में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने की घटना को भाजपा ने ‘महा जंगलराज’ का प्रतीक बनाया है ।
प्रधानमंत्री मोदी ने कूचबिहार की रैली में कहा, “जब न्यायिक अधिकारी सुरक्षित नहीं हैं, तो आम लोग कैसे सुरक्षित रहेंगे? TMC का समय पूरा हुआ। 4 मई के बाद कानून अपना काम करेगा, चाहे गुंडा कितना भी बड़ा क्यों न हो।” उन्होंने TMC पर ‘कट मनी’, भ्रष्टाचार और ‘सिंडिकेट राज’ को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया ।
‘अपील्सन’ और घुसपैठ का मुद्दा
बीजेपी ने घुसपैठ और जनसांख्यिकीय बदलाव के मुद्दे को भी खूब भुनाया है। पीएम मोदी ने TMC के चुनाव घोषणापत्र को ‘इश्तहार’ (विज्ञापन) कहकर संबोधित करते हुए इसे बंगाल की पहचान के साथ खिलवाड़ बताया । उन्होंने आरोप लगाया कि TMC सरकार घुसपैठियों को वोट बैंक के तौर पर संरक्षण दे रही है और CAA का विरोध कर रही है ।
TMC का पलटवार: ‘बदला’ और ‘SIR धांधली’
वहीं, ममता बनर्जी ने भाजपा पर पलटवार करते हुए चुनाव को ‘बदला’ बताया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि भाजपा ने ‘विशेष गहन संशोधन’ (SIR) अभ्यास के तहत जानबूझकर मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाए हैं। समसेरगंज में एक रैली में उन्होंने कहा, “अपने नाम हटाए जाने का बदला लेने के लिए वोट करें।” TMC ने इसे अनुचित तरीके से वोटरों को बाहर करने की साजिश बताया है।
3. 5 प्रमुख सीटें जो तय करेंगी सरकार का गणित
पूरे 294 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं, लेकिन कुछ सीटें ऐसी हैं जहां का परिणाम पूरे प्रदेश की दिशा तय करेगा:
भवानीपुर: यह सीट सबसे गर्म है। यहां से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (TMC) चुनाव लड़ रही हैं और उनके सामने सुवेंदु अधिकारी (BJP) हैं। यह प्रतिष्ठा की लड़ाई है, क्योंकि 2021 में नंदीग्राम में हार के बाद दीदी ने यहां से उपचुनाव जीता था। अब दोबारा सीधा मुकाबला है ।
नंदीग्राम: पूर्वी मिदनापुर की इस सीट पर सुवेंदु अधिकारी (BJP) मजबूत स्थिति में हैं। उनके सामने TMC ने हाल ही में भाजपा छोड़कर आए पवित्र कर को उतारा है। TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी खुद इस सीट पर नजर रखे हुए हैं ।
खड़गपुर सदर: यहां ‘दादा’ की लड़ाई है। BJP से दिलीप घोष और TMC से प्रदीप सरकार आमने-सामने हैं। दोनों अपने-अपने समर्थकों में ‘दादा’ के नाम से मशहूर हैं ।
मुर्शिदाबाद: यह उन गिनी-चुनी सीटों में से है, जहां कांग्रेस भी तिकोना मुकाबला कर सकती है। BJP के गौरी शंकर घोष, TMC की श्योनि सिंहा रॉय और कांग्रेस के सिद्दीकी अली के बीच कड़ी टक्कर है ।
जादवपुर: यह सीट वामपंथियों (CPI(M)) के लिए उम्मीद की किरण है। यहां TMC और वाम मोर्चे के बीच सीधा मुकाबला है, जिसे देखकर लेफ्ट के भविष्य का अंदाजा लगाया जा सकता है ।
4. जातिगत समीकरण: ‘नमो शूद्र’ से लेकर ‘भद्रलोक’ तक
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार चुनाव में सामाजिक समीकरण बीजेपी की ओर झुकते दिख रहे हैं। नमशूद्र, मतुआ और कंजवारा जैसे पिछड़े समुदायों में बीजेपी की पैठ बढ़ रही है ।
लेकिन इससे भी बड़ा बदलाव ‘भद्रलोक’ (शिक्षित मध्यम वर्ग) में देखने को मिल रहा है। हुगली, हावड़ा और दक्षिण कोलकाता जैसे इलाके, जो कभी वामपंथ या TMC के गढ़ हुआ करते थे, अब कानून-व्यवस्था और विकास की कमी के चलते BJP की ओर देख रहे हैं । डेली पायनियर की एक रिपोर्ट के अनुसार, राजनीतिक हलकों में प्रोजेक्शन है कि BJP को 125 से 136 सीटें मिल सकती हैं, जो बहुमत के आंकड़े 148 के काफी करीब है ।
5. क्या कहते हैं आंकड़े?
हालांकि TMC अभी भी मजबूत स्थिति में दिख रही है, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनावों के आंकड़े बीजेपी के लिए उत्साहजनक हैं। 2024 में TMC को करीब 46% और BJP को करीब 39% वोट मिले थे, जबकि 2021 विधानसभा में यह अंतर 48% और 38% का था । यानी अंतर कम हुआ है।
भारत टुडे के सेगमेंट विश्लेषण के अनुसार, 2024 के लोकसभा नतीजों को आधार मानें तो TMC 192 सीटों पर आगे थी और BJP 90 सीटों पर। हालांकि, यह TMC के लिए पिछली बार के मुकाबले कम है, जिससे संकेत मिलता है कि अगर बीजेपी को 3-4% अतिरिक्त वोट मिल गए, तो बंगाल में कड़ा मुकाबला हो सकता है ।
निष्कर्ष: 4 मई को क्या होगा?
पश्चिम बंगाल का यह चुनाव पूरी तरह से ‘अपवाहन’ (यथास्थिति बनाए रखना) और ‘परिवर्तन’ के बीच की लड़ाई है। TMC ममता बनर्जी के नेतृत्व और कल्याणकारी योजनाओं (जैसे लखपति दीदी, महिला आरक्षण) के दम पर जनता का दिल जीतने की कोशिश कर रही है । वहीं, BJP ‘डबल इंजन सरकार’, विकास, मुफ्त राशन और कानून व्यवस्था सुधार का वादा कर रही है ।
दो चरणों (23 और 29 अप्रैल) में होने वाले इस चुनाव में 4 मई को जब मतों की गिनती होगी, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि बंगाल ने ‘भय’ को खारिज कर ‘भरोसे’ का रास्ता चुना या फिर ‘दीदी’ ने एक बार फिर सबको चौंका दिया ।
हिंदुस्तान टाक (HindustanTak.co.in) अपने पाठकों को इस चुनाव के हर अपडेट से अवगत कराता रहेगा। देखते रहिए हमारे विशेष विश्लेषण, रुझान और एक्सिट पोल के लिए।
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